तुम हो






इतनी शिद्दत से प्यार किया तुमसे. बस तुम्हे खोने के लिए. एक चाँद वो खुबसुरत है लेकिन मुझसे कितना दूर उपर. और एक तुम हो उससे भी बहुत खुबसुरत लेकिन तुम भी मुझसे कही दूर हो. एक चाहत. एक तेरी आहट. एक तेरी खुशबु. और तेरी याद. सब है मेरे पास. तुम्हारे पास मेरा क्या है ? सिर्फ नाम ? वो भी अब तुम्हे याद नहीं होगा. जिस जगह तुम मिले थे मुझे पहली दफा वो जगह वैसी की वैसी है. वो वहां आने-जाने वाले लोग रोजाना वहासे गुजरते है नया दिन जीने के लिए. मै भी रोजाना वहासे गुजरता हु तेरी यादों में एक नया दिन मेरी जिन्दगी से कम करने के लिए.
बचा क्या है अब ? कुछ भी तो नहीं. न मेरा कोई था ना है. फिर भी जमाना समझता है मेरा तुमसे आजभी तआल्लूक है. क्या कहे ज़माने से के सच्चा प्यार सिर्फ होता है मिलता नहीं. खूबसूरती देखने के लायक है उसे महसूस करने की औकात हरएक की होती नही. तगाफुल करती है सारी बाते तेरी मेरे दिल से लेकिन क्या करू मै ? तेरे पास आके तेरा हाथ पकड के तुम्हे मेरे पास भी तो नही ला सकता. बस तुम्हे चाह सकता हु. तुमसे एकतरफा प्यार कर सकता हु. लगी दिल की इस आग को तेरे यादोंसे बुझा तो नही लेकिन कम तो कर सकता हूँ.
बेवफा नहीं कहूँगा मै तुम्हे वरना लोग तुम्हे बुरा कहेंगे. लेकिन बेवफा मै भी तो नही. प्यार अगर करना गुनाह है मेरा तो अकेलेपन की सजा सिर्फ मुझे क्यों मिली ? तुमने क्या ऐसा पाक काम किया है जो तुम्हे खुदाने इस सजा से बक्श दिया ? मेरी मन्नत को कभी कबूल नही किया उस खुदा ने. एक बार क्या मन्नत मांगी खुदा से तुम्हारे लिए की “उसे खुश रखना”. मन्नत अभीभी तुमपर लागु रही है. और बददुआ मुझपर अंमल हो गयी है.
नफरत नही मुझे तेरी. लेकिन अब प्यार आये तुमपर ऐसी बात भी हमारे बिच रही नही. ये जमाना प्यार में पागल बन बैठा है. और मै अकेला एक कमरे के किसे कोने में तुम्हारी याद में रो रहा हूँ. सुन पा रहा है तू ? शायद नही. कैसे सुन भी पाओगी ? तुम किसी और की बाहोंमें अपना सब भुला के सो रही होगी. और मै एक एक मिनिट अपनी आंखे बंद हो ने के लिए तरस रहा हूँ. क्या मिलता है तुम्हे उस गैर से की तुम इतनी खुश हो ? उससे ज्यादा तो मैंने तुम्हे छुआ है. तुम्हारे होठोंकी नमी कायम मैंने रखी. तुम्हारे आंसूको कभी आँखोंके बाहर की दुनिया मैंने कभी दिखाई नही है. और ऐसे में तुम्हे मेरा प्यार कम लगा ऐसा क्यों ? क्या है उसमे जों मुझमे नहीं ? या फिर तुझमे ही कमी थी जो तू सच्चा प्यार महसूस ना कर सकी. चलो अच्छा है. आज ठंड है अभी. और तुम्हे ठंड सहन नही होती. मै पास भी तो नहीं तुम्हे अपनी बाँहोंमें लेने के लिए. लेकिन खुदा का शुक्रिया अदा करता हु के मेरे बाद तुझे अपनी बाहोंमे वो भी इस ठंड में लेने के लिए कोई और भी तो हाजिर है.
तुम उसकी बाहोंमे सो जाना. मै तुम्हारी यांदो को जगाने के लिए इस ठंड में जागता रहूँगा.
बस कभी कभार मेरी याद रखना. क्योंकि, कभी ऐसा ना हो. तुम मेरे सामने हो और मुझे जान भी ना पाए.

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