ए-बेवफ़ा


अपने रिश्ते का दाग तू , बस उस दाग को साफ करने में मैं अपनी जिंदगी गुजार रहा हुँ. रहा क्या है इस रिश्ते में ? तुम्हारे कसमे-वादे और उन्हें पुरा करने कि सिर्फ मेरे अकेले कि जिद. वरना ये प्यार भी भूल जाएगा मेरा दिल तुम्हारी तरह. कौन रहा मेरा ? जब सब थे तब उन्हें दूर किया तुम्हे अपना लिया अब तू दूर है और बाकी सब मुझसे रुठे हुए है. तुम्हारी तरह. अजब समा है , क्या करू ? प्यार कर रहा हुँ तुम्हे भुलाने के लिये. ना याद भूला पा रहा हुँ ना तुम्हारे साथ गुजारे वो पल भुला पा रहा हुँ. बस समय जा रहा है मेरे जिंदगीसे तुम्हारी तरह. बाकी सब तो वैसे का वैसे हि है. तुम्हारी बातें आज भी मुझे याद है जो तुने कहा था मुझे के , ' मुझे छोडकर कभी नही जाना '. जान-ए-जाना जो तुमने कहा मुझसे वो तुम्हे करने का हक नही था.
ऐसा क्यूँ किया ? बिना वजह , बिना बताए , अपना दिल मुझसे छिनकर दुसरे को दे कर क्या मिलेगा तुझे ? वो भी तो प्यार देगा जो मैं तुम्हे देता था. तुम्हारा खयाल रखता था. वो भी खयाल रखेगा. वो अभी तुम्हारे पास है तो उसका प्यार है. दूर रहकर भी प्यार  हो सकता है.  कैसे बताऊ तुम्हे ? तुम्हारे साथ बिताया हर एक पल दिल कि चुभन बना है. मैं वो दर्द सह लेता हुँ तेरे खातीर. परवाह किसको उसकी ? बस अब जी लेता हुँ मिली है जिंदगी तो. ये जिंदगी तेरे नाम थी और तू किसी के जिंदगी के नाम है किसे पता था ? जो हुआ हमारे बिच वो प्यार था अब जो मुझे हो रहा है वो उसी प्यार का दर्द है. बस जी चाहे वैसा जी ले तू ए- बेवफ़ा.
बस मुझे भूल मत जाना, अगर तू मुझे भूल गया तो मेरा अब कोई नही रहा अपना तुम्हारे सिवा.